Saturday, May 2, 2009

तमन्नाए जो मेरी है ,सभी रंगीन फवारे है
गुमनाम अँधेरी राहो में बस खुआबो के उजारे है
हकीकत के आईने में मगर बड़े कड़वे नज़ारे है
ख़ुद की गुमराहियों से फ़िर भी कोई गिला नही मुझे
प्यासे तो रह जाते है वो भी, जो दरिया के किनारे है

1 comment:

  1. ख़ुद की गुमराहियों से फ़िर भी कोई गिला नही मुझे
    प्यासे तो रह जाते है वो भी, जो दरिया के किनारे है

    these lines are best.

    ReplyDelete

तुम्हे जिस सच का दावा है  वो झूठा सच भी आधा है  तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती  जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं  कोरे मन पर महज़ लकीर...